बिहार में एक बार फिर एनडीए कि वापसी के बाद नीतीश ने बतौर मुख्यमंत्री और 13 अन्य ने मंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन शपथ के चार दिनों के अंदर ही उनके शिक्षा मंत्री को त्यागपत्र देना पड़ा. विपक्षी पार्टी ने इसे जनता की जीत बताया है. वहीं, शिक्षा मंत्री मेवालाल का कहना है कि उन्होंने नीतीश की साफ सुथरी छवि बरकरार रखने के लिए इस्तीफा दिया है.
भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्ति तक कोई पद नहीं
बिहार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के चार दिनों के अंदर ही इस्तीफा देना आम जनता के गले नहीं उतर रहा हैं. दूसरी तरफ विपक्ष लगातार नीतीश सरकार पर निशाना साध रहा है. इस्तीफे के मुद्दे पर मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि वो नीतीश के सच्चे सिपाही हैं. जब तक आरोपों से मुक्त नहीं हो जाते इस पद पर नहीं बैठेंगे. मेवालाल पर कुलपति रहते हुए भी करप्शन के आरोप लग चुके हैं. इसी को लेकर विपक्षी पार्टियां नीतीश को टारगेट कर रहीं हैं.
कुलपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद चुनी राजनीति
आपको बता दें कि तारापुर से इलेक्शन जीतने वाले मेवालाल को पहली बार मंत्री बनाया गया था. राजनीति में आने से पहले वो भागलपुर कृषि विश्विद्यालय में बतौर कुलपति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे. 2015 में सर्विस से रिटायर होने बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. बीते दिन नीतीश कुमार से मिलने के बाद मेवालाल ने इस्तीफा दे दिया था.
अशोक चौधरी को शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार
नीतीश कैबिनेट में भवन निर्माण और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी पाने वाले अशोक चौधरी को शिक्षा विभाग का भी दायित्व सौंप दिया गया है.


0 Comments