आखिरी सलाम : राहत इंदौरी

 

 

हर दिल अजीज, ज़िंदादिली जिनकी रगों में लहू बनकर दौड़ती थी  और स्पष्ट छवि जो साए के साथ हमेशा उनके साथ रही. वो मशहूर शायर, गीतकार राहत इंदौरी साहब अब हमारे बीच नहीं हैं.  लेकिन उनके अल्फ़ाज़ हमेशा सब के साथ रहेंगे. मैं अपनी लिखी कुछ पंक्तियां राहत साहब को श्रद्धांजलि के रूप में अर्पित करना चाहता हूं...


आ रहा है महफ़िल में तुम्हारी, ज़मीं का सितारा

यादें छोड़ी हैं, तन्हा कर गया, समझो ये इशारा


जितनी मोहब्बत थी, वतन से, वतन वालों से थी

वो ख़ुशबू जा चुकी है, जो चमन में सालों से थी


हर पौधा, हर पत्ता, हर गली मोहल्ला आहत है

तुम दूर हुए तो क्या ?, दिल में तुम्हारी चाहत है


आज चांद तन्हा है, और सितारें भी मजबूर हैं

पहुंच गए उनकी महफ़िल में जो अपनों से दूर है

                                                          #Trishi






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