ठहरी हुई है ज़िन्दगी, कुछ कहना चाहता हूँ
पल दो पल ही सही संग तेरे रहना चाहता हूँ.
ज़िन्दगी ठहरी है, तेरा हर सितम भी माफ़ है
ज़हन पर होंगे सवाल!, हृदय पाक-साफ है.
हर घड़ी हर पल तुझको याद करता रहा हूँ मैं
इस ज़िन्दगी को जीते हुये भी मरता रहा हूँ मैं.
सोचा न था दिन तेरे इंतज़ार में यूँ बीत जायेंगे
रात पूछेगी तुम्हे! तुम्ही आना हम क्या बताएँगे.
शब-ए- हिज़्र को सिर्फ़ तेरे इर्द गिर्द बुना है हमने
कोई भी दे आवाज़, सिर्फ़ तुमको ही सुना हमने.

1 Comments
Very nice line
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