सिविल अस्पताल: एक झलक


             
सिविल अस्पताल का आरंभ साठ के दशक में हुआ था. तब से लेकर आज तक न जाने कितने मरीजों ने सिविल हॉस्पिटल में स्वास्थ लाभ लिया होगा और कितने अभी  भी स्वास्थ लाभ ले रहे हैं. शहर के मध्य में स्थित सिविल का पूरा नाम   डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल है, लेकिन ज्यादतर लोग इसे सिविल के नाम से जानते- पहचानते हैं.
हजरतगंज चौराहे से लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित है सिविल अस्पताल की अपनी अलग विशिष्टता है, चाहे बात साफ- सफाई की हो या फिर किसी भी चिकित्सीय सुविधा की हो हर क्षेत्र में बेहतर करने का अस्पताल प्रशासन का प्रयास अनवरत जारी है.
तीन मंजिला ईमारत के रूप में सिविल अस्पताल अपने मरीजों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करता है.
जैसे- सिविल प्रशासन मरीजों को खाना एवं सुबह का नास्ता उपलब्ध कराता है.
अस्पताल परिसर में आपको पीने का स्वच्छ जल एवं तमाम ऐसी सुविधाएं भी है जो हर अस्पताल में होनी चाहिए. शौचालय, रैन बसेरा,  तीमारदारों के ठहरने की व्यवस्था भी है.
परिसर में पार्किंग भी उपलब्ध है,  हालांकि ओ पी डी के समय थोड़ी बहुत अव्यवस्था का माहौल बन जाता है.
परिसर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के पास ही अभी हाल ही में औषधियों का छोटा सा गार्डेन बनाया गया है.
जिनमें विभिन्न गुणो से भरपूर औषधियों के पौधे हैं.
जिनकी देखभाल के लिए प्रतिदिन माली आता है.
‌सुबह आठ बजते ही ओ पी डी के पर्चे बनने शुरू हो जाते है एवं  परिसर में हलचल शुरू हो जाती है डॉक्टर अपने- अपने कक्ष में बैठकर मरीजों को देखने लगते है.             
सिविल में डॉक्टर तो अपना दायित्व निभा रहे हैं,  परन्तु कुछेक डॉक्टर्स अपने कर्तव्य पथ से भटककर अपनी जेबें भर रहे हैं जो की अति निंदनीय हैं.
अस्पताल मे बढ़ती बेतहासा mareeji भीड़ जो कभी कभी परेशानी का सबब बनती है. भीड़ की अपेक्षा परिसर काफी छोटा है, यदि इसी तरह की भीड़ रही तो, जल्द ही अस्पताल प्रशासन को परिसर का विस्तार करना होगा या फिर अस्पताल को कहीं पर स्थानांतरित करना पड़ेगा.
अस्पताल में पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है,  सुविधाओं में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है. लेकिन सब कुछ सही है ये पूर्णरूप से नही कहा जा सकता है.

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