भारत देश में काम के साथ साथ महापुरुषो के नाम पर बड़े ही जोर शोर से सियासत करना यहाँ के राजनेताओ की जीवनशैली का अभिन्न अंग सा बन गया है। जो लोग किसी भी मामले को राजनीतिक रंग देने में कतई नहीं चूकते है। और अपनी पार्टी का नफा नुक्सान मुद्दों से जोडकर देखना शुरू कर देते है।
हाल ही में कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने डा ० भीमराव अम्बेडकर में राम जोड़कर भीमराव राम जी अम्बेडकर कर दिया है , जिसके बाद से ही लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। तथा नाम बदले जाने को सरकार की साजिश करार दिया है।
यह बिलकुल सत्य है कि सरकारे एक निश्चित समय के बाद बदलती रहती है। तथ वे अपनि पार्टी की विचारधारा तथा पार्टी से सम्बंधित व्यक्तियों के नाम पर सरकारी योजनाओ , संस्थाओ इत्यादी के साथ जोडती रहती है। मेरे विचार से जिससे आम आदमी के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। तथ राजनीतिक पार्टिया अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए इस तरह के कार्यो में नित्य लगी रहती है।
बाबा साहेब के नाम बदलने के पीछे कोई राजनीतिक सोच नहीं थी। यह केवल उत्तर प्रदेश के राज्यपाल जो कि प्रदेश राजपाल पद के साथ साथ प्रदेश के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे श्री राम नाइक जी का एक प्रयास भर था।
श्री राम नाइक ने ही डा ० भीमराव अम्बेडकर के मध्य राम जोड़ने के लिए उन्होंने ही राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ हि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री गण को भी इस विषय से पत्र लिखकर अवगत करा दिया था। प्रदेश के राज्यपाल श्री नाइक के अनुसार '' भारत क संविधान ' की मूल प्रतिलिपि [हिंदी संस्करण ] पेज संख्या 254 पर डा० भीम राव अम्बेडकर ने हस्ताक्षर करते हुए ' डा० भीमराव रामजी अम्बेडकर लिखा था।
डा० भीमराव अम्बेडकर के नाम में राम जोड़ने का विचार किसी राजनीतिक पार्टी का विचार नहीं था। यह विचार तो राज्यपाल श्री राम नाइक जी का था। जो प्रदेश के सांवैधानिक पद पर आसीन है, तथा अपने कर्तव्यो क निर्वहन बड़ी ही कर्तव्यनिष्ठा के साथ कर रहे है। तथा देश के सभी लोगो को राजनीतिक विचारधारा से परे होकर राज्यपाल श्री राम नाइक जी के इस विचार क स्वागत एवं सम्मान किया जाना चाहिए।

1 Comments
अति सुन्दर किसी कि भावनाओ को समझने की प्रेरणा मिलती है ऐसे लेखो से!
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