हम छोड़ चले
तेरी जमीं तेरा आसमां
हम छोड़ चले
रुख हवाओं का मोड़ा हमने
हम ही हवाओं को छोड़ चले
आईना ख़ुद के दीदार को
तरसता रहा महफ़िल महफ़िल
रंगों का शौक़ था जिन्हें
रंज मिले बस महफ़िल में
दीदार का सबब हम छोड़ चले
तेरी जमीं तेरा आसमां
खुद ही खुद को तोड़ चले
हम छोड़ चले
इन हंसी वादियों का तराना जैसे
बीता हुआ जमाना जैसे
राहों पे थे उनको मोड़ चले
हम छोड़ चले
फ़ुरसत से ताल्लुक़ ज़ुदा करें
खुद से बिछड़े तुझको खुदा करें
हंसी मंज़र ये ख़्वाब दिखायेंगे
न चाहा ये तुझे छोड़ के जाएंगे
हम छोड़ चले
तेरी जमीं तेरा आसमां
हम छोड़ चले
रुख हवाओं का मोड़ा हमने
हम ही हवाओं को छोड़ चले

2 Comments
Superb
ReplyDeleteSeriously superb
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