हाथरस मामलों को लेकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है.ये याचिका तमिलनाडु के एक वकील ने दायर की है. याचिका में हाथरस केस का जिक्र करते हुए कहा गया है कि प्रदेश में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. इसलिए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए.
उधर, पत्रकारों के हितों के लिए काम करने वाली संस्था ने हाथरस कांड की कवरेज से पत्रकारों को वंचित करने के योगी सरकार के फैसले की कड़ी निन्दा की है.
एडिटर गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक पत्र जारी करते हुए कहा है, योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार की कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने जिस प्रकार से मीडिया कर्मियों को रोका है, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया उसकी निंदा करता है.” एडिटर्स गिल्ड ने पत्रकारों के फोन टैपिंग को लेकर भी निंदा की है. गिल्ड ने लिखा, “हाथरस की घटना को कवर कर रहे पत्रकारों के फोन टैप करना भी समान रूप से निंदनीय है. इससे भी खराब स्थिति टैप बातचीत के चुनिंदा हिस्से को सार्वजनिक करना है.”
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में 14 सितम्बर को एक 19 साल की दलित लड़की के साथ चार आरोपियों ने गैंगरेप की वारदात के अंजाम देने के बाद 29 सितम्बर को पीड़िता कि मौत हो गई थी. पीड़िता की मौत के बाद लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. जगह जगह पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए प्रदर्शन हो रहें हैं.


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