रिपोर्टर - राज श्रीवास्तव

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गोपालगंज. बिहार की चर्चा इन दिनों पूरे देश में हो रही हैं. बिहार के चर्चा में रहने की एक दो नहीं बल्कि कई कारण है. नेशनल मीडिया की टीवी स्क्रीन पर बिहार के रहने वाले सुशांत सिंह राजपूत की मौत की खबरें दिन भर चर्चा में बनी रहती हैं. दूसरा कारण आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तेज सरगर्मियां और कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर विपक्ष का नीतीश सरकार पर हमलावर होना. इन सब मुद्दों के अलावा बिहार वर्तमान में बाढ़ की विकराल स्थिति से गुजर रहा है. बाढ़ इतनी भयावह है की लोग घर छोड़कर ऊंची जगह पर आश्रय लेने के लिए पलायन करने को मजबूर हैं.

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इसी बीच खबर है कि बैकुंठ पुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली 24 मुख्य सड़कें बाहर से ध्वस्त हो चुकीं हैं. सड़कों के बुरी तरह ध्वस्त होने के कारण तकरीबन ढाई लाख लोग आवागमन की समस्या से जूझने को मजबूर हैं. महमदपुर - छपरा एन एच पर बाढ़ का पानी बह रहा. इसके अलावा सत्तर घाट छपरा, मीरगंज - सत्तर घाट, बाला पकड़ी मोड़, हमीरपुर राजापट्टी समेत कई अन्य सड़कें के तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गई हैं. इन सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से गोपालगंज, सारण और सीवान जिले का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है. जिससे आम नागरिक को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.


बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल रही सहायता राशि

बैकुंठपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली 22 पंचायतों के लगभग 15000 से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवारों को अभी तक सहायता राशि नहीं मुहैया कराई जा सकी है. 38 1000 से अधिक परिवारों की सूची बैकुंठपुर ब्लॉक को भेजी जा चुकी है. स्थानीय प्रशासन के दावों के अनुसार 24000 बाढ़ पीड़ितों के खाते में सहायता राशि भेजी जा चुकी. जबकि 15 हजार ऐसे परिवार हैं जिनको अभी तक आर्थिक मदद नहीं मिल सकी. बाढ़ के कारण उत्पन्न हुई बदहाली को 1 माह से ज्यादा का समय बीत चुका है ऐसे में किसी भी प्रकार की सहायता न मिलने से स्थानीय लोग रोजी रोटी के संकट से भी जूझ रहे हैं. ब्लॉक के 35 गांवों के 50हज़ार से ज्यादा नागरिक बाढ़ की विभीषिका को झेल नहीं है. ऐसे में सरकारी मदद ही इनका एकमात्र सहारा है. यदि समय से सहायता न मुहैया तो हालात और बदतर हो सकते हैं.